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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

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Saturday, 1 August 2015

ऑनलाइन ईमान

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आज का यह नया दौर है
सामान ऑनलाइन बेचने की होड़ है
सोचता हूँ अगर ऑनलाइन बिकने लगे ईमान
तो कैसे कैसे रहेंगे दाम
बाबु तो रखेंगे पांच सौ से हज़ार
अफसरों के होंगे लाख के पार
करोड़ो में बिकेंगे नेताओ के ईमान
तो दस लाख से ऊपर रहेंगे इंजीनियरों के दाम
पुलिस महकमे का अपना ही एक अलग अंदाज दिखेगा
बेगुनाहों को कुछ प्रतिशत की छूट, तो गुनाहगारों को दुगने दाम पर मिलेगा
वकील कोर्ट के अनुसार तय करेंगे
जितना बड़ा कोर्ट दाम उतना ऊँचा रखेंगे
जज रिटायरमेंट के बाद पद की शर्त रखेगा
किसान मजदुर ईमान ना बेचेगा 

Monday, 12 January 2015

भ्रष्टाचार का जाल

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आओ सुनाऊँ देश का हाल 
कैसा बिछा यहाँ भ्रष्टाचार का जाल 
एक बार मै बनवाने गया प्रमाण पत्र निवास 
बाबु बोला निकाल रूपये पचास 
मिनटों में निवास तुम्हारे हाथ होगा 
चक्कर काटने वाली ना कोई बात होगा 
मैंने कहा मेरे दिए टैक्स से मिलती है तुम्हे तनख्वाह 
क्यों परेशान कर रहे हो मांग कर रूपये बेवजह 
गुस्से में उसने बोला तुम मुझको सिखा रहे हो 
रिश्वत का बना नियम यहाँ, क्यों अपनी मति लगा रहे हो 
अगर नहीं मिला मुझको रूपये पचास 
कूड़ेदान में जायेगी तुम्हारी आवेदन निवास 
मैंने कहा तुम्हारी अधिकारी से करूँगा शिकायत 
फिर बैठेगी तुमपर पंचायत 
उसने कहा एक हिस्सा अधिकारी को भी जाता है 
वही तो हमको वसूली का टारगेट बताता है 
मैंने कहा आपने अभी जो बात कही है 
उसकी एक विडियो बन गई है 
हाथ जोड़कर खड़ा हो गया सामने 
गिडगिडाते लगा माफ़ी मांगने 
पांच मिनट में सील और साइन करा लाया 
निवास को थरथराते मेरे हाथ थमाया 

Friday, 23 November 2012

शिकायत

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उनकी बेखबरी का आलम तो देखो
लगी है भीषण आग उनके शहर में
और वो अपने महलों में बैठ
मधुर तरानों का लुत्फ़ उठा रहे है

रहनुमा बनके फिरते थे हमारी गलियों में
कहते हुए कि हर मुश्किल में साथ निभाऊंगा
आज जब हमारी ज़िंदगी जहन्नुम हो गई
वो कुर्सी पर बैठ मंद मंद मुस्कुरा रहे है

लंबी फेहरिस्त थी उनकी वायदों की
हमारी तंगहाल ज़िंदगी बदलने की बात करते थे
मौका दिया उनको वायदा निभाने की तो
हमको भूल झोलियाँ अपनी भरे जा रहे है

ईद हो या दिवाली संग होते थे हमारे
चेहरे पर मुस्कुराहट और होठों में दुआ रखते थे
अब दर पर जाते है उनके हाल ए ज़िंदगी कहने तो
मिलना तो दूर, हमसे आँखें चुरा रहे है 

Saturday, 17 November 2012

सवाल सरकार से

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एक शख्स बैठ सड़क पर
पूछता है सवाल सरकार से
जिनके दम पर है ये मुल्क सारा
क्यों त्रस्त है वो महंगाई की मार से

क्यों देती है तुम्हारी नीतियाँ
संरक्षण भ्रष्टाचारियों, अत्याचारियों को
क्यों करती है तुम्हारा प्रशासन
नज़रंदाज़ इनकी कारगुजारियों को

किसानों की मौत, मजदूरों के शोषण का
क्या है तुम्हारे पास जवाब
जनता के पैसों की चोरी का
कब दोगे तुम हिसाब

गलत लगते है तुम्हारे
हर दावे और दलीलें ऐ सरकार
समझ चुके है अब हम
तुम्हारी नियत भंली प्रकार 

Tuesday, 6 November 2012

घोटाले

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मनमोहन तेरे राज में
और कितने मंत्री होंगे बदनाम ?
बड़े-बड़े घोटालों के अलावा
कुछ भी ना हुआ काम

अपाहिजों की बैशाखी कर चोरी
कानून मंत्री करते है मुंहजोरी
संचार मंत्री ने बेचे सरेआम
अरबों के स्पेक्ट्रम कौडियों के दाम

घाना को हुआ जब चाँवल निर्यात
विदेश मंत्री के रंग गए हाथ
कोयले की कालिख लगी खुद तुझपर
आखिर हम विश्वास करे तो किसपर

जयपाल और जयराम ने चुकाई इमानदारी की कीमत
विभाग बदलकर दे दी उद्योगपतियों को राहत
काँमनवेल्थ में हुआ था जो कबाड़ा
शीला और कलमाड़ी का था एक दूसरे को सहारा

Sunday, 4 November 2012

घोर कलयुग

2 comments:
देखो घोर कलयुग है आया
बड़ी गजब है इसकी माया
दौलत को भगवान बनाया
बिन दौलत अपने भी पराया

दौलत से चलती सरकार
जनता की होती तिरस्कार
मंत्री करता जितना बड़ा भ्रष्टाचार
मिलता उसको उतना बड़ा पुरस्कार

चोर संग पुलिस खाए मलाई
रिपोर्ट दर्ज कराने वाले की होती पिटाई
जेल के अंदर वो है जाता
जो जनता में अलख जगाता

जनसेवकों को मिली रिश्वत की खुली छूट
हरकोई जनता को रहा लुट
बेईमानों का होता सम्मान
ईमानदार सहते अपमान 

Saturday, 20 October 2012

भ्रष्टाचार (corruption)

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गहरी जमी है जड़े भ्रष्टाचार की
साफ़ नहीं दिखती नियत सरकार की
आरोप लगते है जब भ्रष्टाचार की
कहते है ये बात है बिना आधार की

एक चपरासी से लेकर अधिकारी तक
निजी से लेकर सरकारी तक
वकील से लेकर धर्माधिकारी तक
हो गए है सब भ्रष्ट, आम जनता है त्रस्त

राशन कार्ड की बात हो या वीजा कार्ड की
बात नहीं बनती बिना उपहार की
वृध्दावस्था पेंशन हो या विधवा पेंशन
बिना कमीशन होता है टेंशन

औद्योगिक घराना हो या कोई नेता
सबने मिलकर ही देश को लुटा
कालाधन का मामला हो या टैक्स चोरी की
खूब फायदा उठाते है कानून की कमजोरी की

घोटालों के लिए बनती है नई योजनाएं
नेता और अफसर मिलबांट कर खाए
किसानों की जमीन हड़प कर गए
देश को दीमक की तरह चट कर गए

Monday, 17 September 2012

यहाँ कागज के टुकडो पर बिकते है लोग (People of here are sold on pieces of paper)

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ये कैसा जमाना आ गया, मै रहा हू सोच
यहाँ कागज के टुकडों पर बिकते है लोग

जनता का सेवक ही, जनता को रहा लुट
धर्म कि बात कौन कहे, यहाँ भाई-भाई में है फुट

डकैती का एक हिस्सा जाता है पहरेदारो को
यहाँ इनाम से नवाज़ा जाता है गद्दारों को

कानून के रखवालों के सामने लुटती है अबलाओ कि अस्मत यहाँ
लुटेरा बना है राजा, उसे है जनता कि फ़िक्र कहाँ

आज भूखा सो रहा सबको खिलानेवाला
एक झोपड़ी के लिए तरस रहा महलों को खड़ा करनेवाला

मंदिर मस्जिद से ज्यादा भीड़ होती है मधुशालाओं में
अब तो फूहड़ता नज़र आती है सभी कलाओं में 

Thursday, 30 August 2012

बेईमानों का राज

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बेईमानों का राज है भैया, बेईमानों का राज
समझ लो तुम ये आज, समझ लो तुम ये आज

नई नई योजनाये बनती करने नए घोटाले
गरीबो का नाम दिखाकर अपनी झोली में ये डाले
सड़को को कागजो में बनाकर मरम्मत का भी पैसा निकाले
पेंशन के बटवारे में भी करते है गडबडझाले

बेईमानों का राज है भैया, बेईमानों का राज
समझ लो तुम ये आज, समझ लो तुम ये आज

गाँव का सबसे अमीर है होता बीपीएल कार्डधारी
योजनाओ का लाभ लेने में आती उसकी पहली बारी
गरीब तो बीपीएल में नाम जुडवाने अपनी पूरी उम्र है गुजारी
इनकी जिंदगी नहीं बदलती चाहे हो कोई भी पार्टी सत्ताधारी

बेईमानों का राज है भैया, बेईमानों का राज
समझ लो तुम ये आज, समझ लो तुम ये आज

अपराधिक मामले है जिनपर लड़ते वही चुनाव
जीतने के बाद जनता से ये कहते हमारे सामने सिर झुकाव
अफसर भी नहीं बढ़ाते फाइल लिए बिन पैसे
पिसती है बस आम जनता ऐसे या वैसे

बेईमानों का राज है भैया, बेईमानों का राज
समझ लो तुम ये आज, समझ लो तुम ये आज


ये हालात बदलना चाहता हूँ

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बहुत सह लिए अन्याय अब, ये हालात बदलना चाहता हूँ
सरफरोशी जो जागी है अब , ये जवानी वतन के नाम करना चाहता हूँ

कर रहे बेईमान, भारत माँ का आंचल मैला रोज
भागीरथी मै नहीं मगर, हर गांव में गंगा बहाना चाहता हूँ

लुट रहे भारत माँ को, अपने ही वतनवाले रोज
लुटती हुई भारत माँ की, आबरू बचाना चाहता हूँ

जागते इंसान कर रहे यहाँ मुर्दों सा व्यवहार
मुर्दे भी लगाए जयघोष के नारे, ऐसी अलख जगाना चाहता हूँ

अब जो जागा हू तो मै, कुछ कर गुजरना चाहता हूँ
लगी है आग जो मेरे सीने में, सबके सीने में लगाना चाहता हूँ  

Tuesday, 7 August 2012

इंसान और शैतान (Man And Devil)

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विवश है आज का हर एक आम इंसान
मौज उड़ा रहा है शैतान
मानवता खो रही अपनी पहचान
जुल्म मिटाने वाला कहा गया वो भगवान

सितमगरो ने कुछ ऐसा कहर ढाया है
रोम रोम में दर्द समाया है
सड़क पर गिरा लहू जुल्म कि कहानी कहती है
भूख से तडपकर जान क्यों निकलती है

सबको खिलाने वाला ही आज दर दर भटक रहा
दर्द सहने कि सीमा पार हुई, पाँव पटक रहा
जिनके मेहनत से महले खड़ा होती है
आज वही एक झोपडी के लिए तरस रहा

कुछ इस कदर लुटा है हमें इन शैतानो ने
जैसे लुटा न गया हो किसी से जमानो में
केवल दर्द कि दास्तान होती है अब पैगामो में
वो आज़ादी पाने कि जूनून कहा गई दीवानों में 

Friday, 20 July 2012

भाग अधर्मी भाग(Run Impious run)

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भाग अधर्मी भाग
जनता के दिलो में लग चुकी है आग

तुने ही लुटा है इनको
तुने ही बांटा है इनको
आखिर कब तक सहते ये अन्याय
मिलाने आ रहे है तुझे खाक
भाग अधर्मी भाग
जनता के दिलो में लग चुकी है आग

गद्दी पे बिठाया तुझको
पर तुने रुलाया सबको
बहुत सह चुके अब
मांगने आ रहे है हर एक दर्द का हिसाब
भाग अधर्मी भाग
जनता के दिलो में लग चुकी है आग

झूठे किये थे तुने वादे
नेक नहीं थे तेरे इरादे
अपनी शक्तियों का किया दुरूपयोग तुने
जनता समझ चुकी है टरइ नियत आज
भाग अधर्मी भाग
जनता के दिलो में लग चुकी है आग 

Tuesday, 17 July 2012

भेड़ कि खाल पहन लोमड़ी आया है ( A fox has come with lambskin)

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भेड़ कि खाल पहन लोमड़ी आया है
चारो तरफ लुट खसोट मचाया है
सभी जगह जाल बिछाया है
सबको बेवकूफ बनाकर माल खुद खाया है

मुह से मीठी वाणी बोलकर
छल कपट से काम लेता है
भाई बांधव क्या चीज़ है
ये हर किसी को दगा देता है

कई तरह के है चाले चलता
पर सबके सामने है भोला बनता
बहुत खतरनाक है इसका खेल
इसके कर्मो का शक्ल से नहीं है मेल

बड़ी चतुराई से है काम करता
जो इसके खिलाफ हो उसको यह बदनाम करता
अब तो इसको पहचान जाओ
अपनी कौम से इसे दूर भगाओ 

Tuesday, 3 July 2012

डरता हू मै कहीं मेरे दामन में दाग न लग जाए

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डरता हू मै कहीं मेरे दामन में दाग न लग जाए
डरता हू मै कहीं लोग मुझे बेईमान कहकर न बुलाये
इसीलिए अपने कर्मो को साफ़ सुथरा रखता हू
जो मेरे जमीर को भाये वही काम करता हू
भ्रष्टाचार के नाम से ही चिढ आती है
गद्दारों कि संगत मुझे नहीं भाती है
आज ऊपर से नीचे तक हर कोई रिश्वत ले रहा
आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा दे रहा
एक गरीब को साबित करने के लिए कि वो गरीब है
पैसा दे रहा ये कैसा उसका नसीब है
भ्रष्टाचारियों ने एक ऐसा किला है बनाया
जिसको आज तक कोई भेद नहीं पाया
निकला हू मै इसे उजाड़ने
सच्चाई और इमानदारी का झंडा गाड़ने 

नेताजी (Politician)

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नेताजी है बड़े चतुर
चुनाव लड़ने रहते आतुर
लोगो को झूठे वादों में फसाते है
चुनाव जीतने के बाद सब भूल जाते है
भोलीभाली जनता को बेवकूफ बनाते है
झोलियाँ अपनी भरते जाते है
केवल चुनाव के समय ही दीखते है
बाकी समय तो विदेश में फिरते है
उज्जवल कपड़ो में हमेशा रहते है
करम उतने ही बुरे करते है
भ्रष्टाचार इनके लिए आम बात है
अय्याशी में गुजरती हर रात है
पाल के रखते है ये गुंडे
एक नहीं कई मुस्टंडे
जो बोले इनके खिलाफ
बंद कर देते उसकी आवाज़ 

Friday, 29 June 2012

जनता का नौकर आज जनता का राजा बना है (Public servant has become a king of public)

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जनता का नौकर आज जनता का राजा बना है
सच है ये बात कि आज इमानदारी से काम करना मना है

गुंडागर्दी आज एक सद्गुण है
सदाचार आज एक अवगुण है
नेता वही बनता है
जो बेईमानी में निपुण है

जनता का नौकर आज जनता का राजा बना है
सच है ये बात कि आज इमानदारी से काम करना मना है

चापलूसी करना जिनका काम है
आज उन्ही अफसरों का नाम है
सिध्दान्तो और वसूलो में चलनेवाले
तो आज बदनाम है

जनता का नौकर आज जनता का राजा बना है
सच है ये बात कि आज इमानदारी से काम करना मना है

जो झूठ बोलते है और ठगी करते है
आज वही तो अमीर बनते है
सच्चाई कि राह में जो चलते है
जिंदगी भर गरीब रहते है

जनता का नौकर आज जनता का राजा बना है
सच है ये बात कि आज इमानदारी से काम करना मना है


Monday, 25 June 2012

पर दिल में है एक तूफ़ान (There is storm in my heart)

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खामोश है जुबान
पर दिल में है एक तूफ़ान

सहनशक्ति है अपना धैर्य खो चुकी
मानवता भी अब बहुत रो चुकी
अन्याय अब कोई न सहन होगा
मानवता भी अब कही न दफ़न होगा
खामोश है जुबान
पर दिल में है एक तूफ़ान

भ्रष्टाचारियो पर अब लगेगी लगाम
रिश्वतखोरी का होगा काम तमाम
हम करेंगे ऐसा काम
की भारत का हो ऊँचा नाम
खामोश है जुबान
पर दिल में है एक तूफ़ान

न्याय के लिए अब संघर्ष होगा
बलिदान देश के लिए सहर्ष होगा
अब साथ मिलकर चलना होगा
अधिकारों के लिए लड़ना होगा
खामोश है जुबान
पर दिल में है एक तूफ़ान


सियासतदानो ने कुछ ऐसा रचा है षड़यंत्र (It is a conspiracy hatched by some politicians)

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सियासतदानो ने कुछ ऐसा रचा है षड़यंत्र
की इनके बस में हो गया है ये पूरा तंत्र

जाति पाति और धर्म का भेद बढ़ाते है
हमें आपस में लड़ाते है
वोट की राजनीती कर भरपूर फायदा उठाते है
और चुनाव जीतकर संसद में पहुच जाते है
सियासतदानो ने कुछ ऐसा रचा है षड़यंत्र
की इनके बस में हो गया है ये पूरा तंत्र

गुंडागर्दी करते न आती इनको शरम
भ्रष्टाचार करना है इनका प्रमुख करम
मुनाफावसूली को देते है बढावा
रिश्वत लेना है इनका प्रमुख चढ़ावा
सियासतदानो ने कुछ ऐसा रचा है षड़यंत्र
की इनके बस में हो गया है ये पूरा तंत्र

जनता का पैसा अपने अय्याशी में उड़ाते है
बिना मतलब के विदेश दौरे में जाते है
उद्द्योगपतियो को पैसो के लिए धमकाते है
कुछ छोटे मोटे काम कर अपने को धर्मात्मा बताते है
सियासतदानो ने कुछ ऐसा रचा है षड़यंत्र
की इनके बस में हो गया है ये पूरा तंत्र  

Saturday, 23 June 2012

और ये कहते है हो रहा भारत निर्माण (And they say Bharat Nirman is going on)

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ऊपर से निचे तक हर कोई कर रहा भ्रष्टाचार
और ये कहते है हो रहा भारत निर्माण

महंगाई करो कम ,जनता कर रही ये पुकार
कम होने के बजाय ले रहा ये दैत्याकार
बढती बेरोजगारी से मचा है हाहाकार
ये सब देखते हुए भी चुप बैठी है सरकार
ऊपर से निचे तक हर कोई कर रहा भ्रष्टाचार
और ये कहते है हो रहा भारत निर्माण

अपराधियों को सजा न मिल पा रही
गुंडागर्दी दिनोदिन बढते जा रही
न्याय के चौखट पर अन्याय हो रही
पर सरकार तो चैन की नींद सो रही
ऊपर से निचे तक हर कोई कर रहा भ्रष्टाचार
और ये कहते है हो रहा भारत निर्माण

किसान और मजदुर आज तड़प रहा
उनकी मेहनत का सही कीमत न मिल रहा
लोग इलाज की कमी में मर रहे
क्योकि डाक्टर समय से न मिल रहे
ऊपर से निचे तक हर कोई कर रहा भ्रष्टाचार
और ये कहते है हो रहा भारत निर्माण

Friday, 22 June 2012

भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर (corrupt politician and dishonest officer)

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भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर
करते है भ्रष्टाचार इस कदर

जनता को ठेंगा दिखाकर
कोठियां भरते है अपनी
जो इनके खिलाफ बोले
देते ये उन्हें धमकी चमकी
भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर
करते है भ्रष्टाचार इस कदर

सडको को कागजो में बनाकर
मरम्मत का भी पैसा निकालते
गरीबो तक आनाज पहुचने से पहले
ये सारा माल है बेच डालते
भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर
करते है भ्रष्टाचार इस कदर

इमानदारी से कोई करे काम
तो करते है ये उसका जीना हराम
अपनी शक्ति का दुरूपयोग है करते
आमजन को डराते फिरते
भ्रष्ट नेता और बेईमान अफसर
करते है भ्रष्टाचार इस कदर