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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

Saturday, 19 May 2012

फरियाद (Request)

हे प्रभु हम किसानो की फरियाद सुनो
थोड़ी सहूलियत हमें भी तो दो
बेमौसम  बारिश कराते हो
हम किसानो को कितना रुलाते हो
अनाज उगाने के लिए सारी मेहनत हमसे कराते हो
फायदा मुनाफाखोरो और बिचौलिए का कराते हो
कुछ ऐसी व्यवस्था बनाओ 
सस्ते दामो में बीज और खाद उपलब्ध कराओ
सिंचाई के लिए न हो हम परेशान
ज़िन्दगी करो थोड़ी हमारी आसान

हिम्मत न हार (Don't Give Up)

हिम्मत न हार , बन्दे  हिम्मत न हार
बाधाओं पर कर प्रहार , कर प्रहार
अब न सह ये अत्याचार , ये अत्याचार
पापियों का कर संहार , कर संहार
हिम्मत न हार, बन्दे हिम्मत न हार
अभी तो ये है मजधार , मजधार
जाना है तुझे उस पार, उस पार
जल्दी चला तू अपनी पतवार ,पतवार
हिम्मत न हार , बन्दे हिम्मत न हार
करना है तुझे सपने साकार , कर साकार
मत होने दे अपनी ज़िन्दगी बेकार ,बेकार
कर ऐसा काम की हो तेरा आदर सत्कार, आदर सत्कार
हिम्मत न हार , बन्दे हिम्मत न हार

Friday, 18 May 2012

मंजिल (Destination)

हौसला रख वो समय भी आएगा
जब तू अपनी जीत का परचम लहराएगा
हर बुराई तुझसे हार जायेगा
हर अच्छाई तुझसे जुड़ता चला जायेगा
वैसे तो रास्ते में बाधाएं आएँगी बहुत
लेकिन तेरे धीरज से वो दूर होते चले जायेगा
रुकना न तू कभी हार के
बाधाओं को फेंक दे उखाड़ के
मेहनत कर तू लगन से
पर्वत को भी तू मैदान कर जायेगा
मंजिल अभी दूर है मगर बढते चल
आज नहीं तो कल मिल ही जायेगा

Thursday, 17 May 2012

मेरी कविता(My Poem)

ज़िन्दगी में एक लहर सी उठी है
कुछ नया करने का मन में ठनी है
कविता लिखने का ख्याल मन में आया है
पर दिमाग में हर तरफ अँधेरा छाया है
सोच रहा हु क्या लिखू ?
अपने या देश के बारे में कुछ कहू ?
देश हमेशा ही मुझसे बड़ा है
मन में बहुत से सवाल खड़ा है
महंगाई से जनता हो गई है त्रस्त
नेता और प्रशासन हो गए है पस्त
भ्रष्टाचार चारो ओर फैला है
हो रहा भारत माँ का आंचल मैला है
एक तरफ बेरोजगारी लोगो की जान ले रही है
दूसरी तरफ नेताओ और अफसरों के घर भंडार भरी पड़ी है
किसान कड़ी मेहनत के बाद जो कमाता है
मुनाफाखोर उससे दुगुना ले जाता है
मजदुर अपनी मजदूरी बढाने  के लिए रो रहा है
क्योकि थोड़ी से पैसो से खर्च पूरा नहीं हो रहा है
लेकिन मालिक तो मज़े से सो रहा है

सपनो का भारत (India Of Dream)

खून का हर एक कतरा वतन के नाम हम करेंगे
अपनी जवानी को बदनाम न हम करेंगे
वतन के लिए ही जियेंगे और वतन के लिए ही मरेंगे
जो वतन की राह में आया उसे मिटा दिया हम करेंगे
भ्रष्टाचार मुक्त वतन का निर्माण हम करेंगे
सबको न्याय मिले ऐसी व्यवस्था हम करेंगे
बेरोजगारी में न फिर कोई दिन गुजरेगा
सब हाथो को मिले रोजगार ऐसी व्यवस्था हम रखेंगे
महंगाई को हम न बढने देंगे
किसी किसान को न आत्महत्या करने देंगे
भय और आतंक को न हम बढने देंगे
ऐसी सुरक्षित भारत का निर्माण हम करेंगे  

Wednesday, 16 May 2012

भ्रष्ट नेता और अफसर (Corrupt politician and Officer )

भ्रष्ट नेता  और  अफसरों  ने  सड़को का  ऐसा  किया  है  काम
बड़े  बड़े  गड्डे रहते  है  इसमें  और  लगा  रहता  है  जाम
बिना  काम  किये  पाए  ये  इनाम
जो  इनके  खिलाफ  बोले  करते  ये  उसे  बदनाम
भ्रष्ट  अफसरों  और  नेताओ  पर  अगर  कसी जाये  लगाम
पूरे  भारत  से  हो  जाये  भ्रष्टाचार  का  काम  तमाम
कोई  न  कर्मचारी  फिर  रहेगा  बेलगाम
समय  से  पूरे  होंगे  सारे  काम
पुकारे भारत  का  हर  एक  अवाम
भ्रष्टाचार  का  न  रहे  नामो निशान

Monday, 14 May 2012

बारिश (Rain)

आसमान पर छाई है काली घटाएँ
सूरज भी जा छुपा है बादलों के साये 

तेज बहती पवन और पत्तों की सरसराहट 
लगती है ऐसे जैसे हो तूफ़ान की आहट

चकाचौंध रौशनी सी बिजली की चमक 
बादलों की गडगडाहट और बूंदों की धमक 

पहली बारिस की बुँदे मिट्टी की सौंधी महक 
सुखी तरसती धरती उठी है चहक 

कभी रिमझिम फुहार तो कभी मूसलाधार 
कभी थम के बरसता है तो कभी लगातार 

आवारा हवा (Strolling Air)

मै एक आवारा हवा
नहीं मुझे किसी की परवाह 
उड़ता फिरता हू मै हर कहीं 
कभी बादलों के ऊपर
तो कभी पेडों की छाँव तले
कभी समुन्दर के लहरों से खेलता हू 
तो कभी पर्वतों को धकेलता हू 
कभी नदियों के संग बहता हू 
तो कभी पंक्षियों के संग उड़ता हू 
बर्फीली चादर को छू ठिठुरता हू 
लू के थपेडों से जलता हू 
कभी किसी के आंसुओ के संग गिरता हू 
तो कभी मुस्कुराते लबो को छूता हू 
कभी नावों में बैठ झीलों कि सैर करता हू 
कभी किसी पेड़ से बैर करता हू 
मै एक आवारा हवा 
नहीं मुझे किसी की परवाह