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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

Friday, 8 June 2012

जाने कहा ले जाएगी ये ज़िन्दगी

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जाने कहा ले जाएगी ये ज़िन्दगी
और कितना सताएगी ये ज़िन्दगी

सूरज की तरह अपने आप में जल रहा हु मै
बर्फ की तरह तिल तिल कर पिघल रहा हु मै 
टुकडो में जी रहा हु , गिर गिर सम्हाल रहा हु मै
जाने कहा ले जाएगी ये ज़िन्दगी
और कितना रुलाएगी ये ज़िन्दगी

हर लड़ाई मै हार जाता हु
कुछ न हासिल मै कर पाता हु
अब की बार विजय ,अपने दिल को समझाता हु
जाने कहा ले जाएगी ये ज़िन्दगी
और कितना तडपायेगी ये ज़िन्दगी

सोचता हु जो उससे उल्टा हो जाता है
जो पास होता है वो भी खो जाता है
क्यों हो रहा है ये मेरे साथ मै न समझ पाता हु
जाने कहा ले जाएगी ये ज़िन्दगी
और कितना सताएगी ये ज़िन्दगी 

एक दोराहे पर खड़ा हु मै (I have been at a crossroad)

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एक दोराहे पर खड़ा हु मै
समझ नहीं आ रहा किधर जाऊ

एक रास्ता अन्याय सहने पर मजबूर करता है
तो दूसरा अन्याय के विरुध्द लड़ने पर गुरुर करता है
एक रास्ता नियति पर भरोसा करता है
तो दूसरा अपनी किस्मत खुद लिखने पर
एक दोराहे पर खड़ा हु मै
समझ नहीं आ रहा किधर जाऊ

एक रास्ता गुमनामी की तरफ ले जाता है
पर दुसरे में ज़िन्दगी का भरोसा नहीं
दुसरे रास्ते में मुश्किलें है बहुत
तो पहले में मंजिल का पता नहीं
एक दोराहे पर खड़ा हु मै
समझ नहीं आ रहा किधर जाऊ

एक रास्ता मोह में बांधे रखता है
तो दूसरा विरक्ति की ओर ले जाता है
एक रास्ता सुकून की ज़िन्दगी गुजारने वाला है
तो दूसरा हर पल नया करने वाला है
एक दोराहे पर खड़ा हु मै
समझ नहीं आ रहा किधर जाऊ

Thursday, 7 June 2012

पर मै ज़िन्दगी को जीता हु

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ज़िन्दगी तो चलती तेरी भी है
पर मै ज़िन्दगी को जीता हु

दर्द मिलते है राहो पे हज़ार
पर सारे दर्द को मै पीता हु
तू अन्याय को सहता है
मै अन्याय के विरुध्द लड़ता हु
ज़िन्दगी तो चलती तेरी भी है
पर मै ज़िन्दगी को जीता हु

तू मुश्किलों से समझौता कर लेता है
मै मुश्किलों से लड़ा करता हु
तू खाने के लिए जीता है
मै जीने के लिए खाता हु
ज़िन्दगी तो चलती तेरी भी है
पर मै ज़िन्दगी को जीता हु

तू थोडा सा दुःख झेल नहीं पाता
मै हजारो दर्द सीने में दबाये खुश रहता हु
तू ऐशो आराम के लिए पैसे कमाता है
मै अपनी कमाई से जरुरत पूरी कर आनंदित रहता हु
ज़िन्दगी तो चलती तेरी भी है
पर मै ज़िन्दगी को जीता हु


Wednesday, 6 June 2012

व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है (The time has come to change the system)

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व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है

मुनाफाखोरी की बीमारी लगी सभी को
महंगाई से जनता त्रस्त हो गई तभी तो
न्याय मिलने में देरी हो रही है
राष्ट्रिय संपत्ति चोरी हो रही है
व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है

सडको का हाल बेहाल है
दूर दूर तक न कोई अस्पताल है
सरकार आँखे मूंदे बैठी है
चोरो का अड्डा तो पुलिस चौकी है
व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है

नौकरशाही सब पे भारी है
हर एक को रिश्वतखोरी की बीमारी है  
भ्रष्ट लोगो के खिलाफ जो आवाज़ उठाता है
बहुत जल्दी ही आवाज़ दबा दिया  जाता है
व्यवस्था परिवर्तन का समय आ गया है
भ्रष्टाचार पूरी तरह छा गया है

बारिश का मौसम (Rainy season)

14 comments:
बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है
प्यासी  धरती  की  प्यास  बुझाती  है
धुलो  का  उड़ना  बंद  कर  जाती  है
मिटटी  की  भीनी  सुगंध  फैलाती  है
बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है

भीषण  गर्मी  से  बचाती  है
शीतलता  हमें  दे  जाती  है
मुसलाधार  प्रहारों  से  पतझड़  को  भागाती  है
बहारो  का  मौसम  लाती  है

बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है

चारो  ओर  हरियाली  फैलाती  है
नदियों  का  पानी  बढाती  है
तालाबो  को  भर  जाती  है

बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है

बारिश  के  चलते  ही  खेती  हो  पाती  है
किसानो  के  होठो  पे  मुस्कान  ये  लाती  है
रिमझिम  फुहारों  से  सुखा  मिटाती  है

बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है

मोरो  को  नचाती  है
पहाड़ो  में   फूल  खिलाती  है
बीजो  से  नए  पौधे  उगाती  है

बारिश  जब  आती  है 
ढेरो  खुशिया  लाती  है

अनमोल वचन (Precious Speech )

1 comment:
कोई  रोके  कितना  भी
पर  तुम  कभी  रुकना  नहीं
कोई  झुकाए  कितना  भी
पर  तुम  कभी  झुकना  नहीं
कोई  भड़काए  कितना  भी
पर  तुम  कभी  भडकना  नहीं
कोई  बहकाए  कितना  भी
पर  तुम  कभी  बहकाना  नहीं
कोई  डराए  कितना  भी
पर  तुम  कभी  डरना  नहीं
कोई  करे  अन्याय  तो
तुम  कभी  सहना  नहीं
भ्रश्चार  से  लाभ  हो  कितना  भी
पर  तुम  कभी  करना  नहीं
खेल  बुजदिलो  सा
तुम  कभी  खेलना  नहीं
झूठ  भूलकर  भी
तुम  कभी  बोलना  नहीं
गलत  रास्ते  पर
तुम  कभी  चलना  नहीं
कडवे  बोल
तुम  कभी  कहना  नहीं
बीच  रास्ते  से
तुम  कभी  मुड़ना  नहीं 

Monday, 4 June 2012

मंजिल तो मिल ही जाती है (The goal is to get )

2 comments:
तुझे अब नहीं रोना है
समय एक पल भी नहीं खोना है

जो हुआ उसे भूल जा
लक्ष्य पर नज़रे टिका
कदम कदम बस बढते जा
लक्ष्य का नशा चढ़ा

पीछे मुड़कर न देख कभी
बाधाओं को पार कर जा सभी
हो दर्द तो मत कराह कभी
झेल जा दर्द सभी

हर मोह का तू त्याग कर
हमेशा के लिए बन जा निडर
सोचता है जो करके बता
दुनिया को जीत के दिखा

राह आसान होते जायेगा
जब तू हिम्मत से बढ़ता जायेगा
जो भी मुश्किल आएगा
तू जीतता चला जायेगा

बीते लम्हों का न कर अफ़सोस तू
भर अपने में जोश तू
कभी हार के रुकना नहीं
मुश्किलों में झुकना नहीं

मंजिल तो मिल ही जाती है
बस ज़रा सा तडपाती है

वीर तुम कहलाओगे (You will be called warrior )

No comments:
कांच के जैसे सीने से
तुम मंजिल कैसे पाओगे

पत्थर सा सीना कर
तुम हर हाल में जीत जाओगे

कायरो सा जीना नहीं
अन्याय को मत सहनकर
लड़ते हुए गई जान अगर
तो शहीद तुम कहलाओगे

रखेंगे लोग याद तुझे
अमर तुम बन जाओगे

उठा हथियार अपनी
दुश्मनों का सर कलमकर
जीत गए तुम अगर
तो वीर तुम कहलाओगे

होगी चारो ओर तुम्हारी बाते
तुम प्रसिध्दि पाओगे

Sunday, 3 June 2012

ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming)

1 comment:
ग्लोबल वार्मिंग के बारे में बतलाता हु
इसका सही मायने समझाता हु
पेड़ काटे जायेंगे अगर बेतहाशा
तो तापमान बढता रहेगा हमेशा
फैक्ट्री लगाये जा रहे रोज हज़ार
वायु प्रदुषण बढ रहा लगातार
कार्बन डाई आक्साइड अगर बढेगा
तो तापमान भी चढ़ेगा
तापमान के बढ़ने से
ग्लेशियर का बर्फ पिघल रहा
समुद्र किनारे के लोगो का
जीना मुश्किल कर रहा
जलवायु रहा बदल
भयंकर आंधिया रही चल 
एक तरफ जनसँख्या बढ रही
दूसरी तरफ रहने के लिए जमीने कम पड़ रही
ग्लोबल वार्मिंग को अगर काबू में लाना है
तो जन जन में इसके लिए जागरूकता फैलाना है
पेड़ो को कटने से बचाना है
चारो ओर हरियाली बढाना है

आपस की लड़ाई (Battle of interconnect)

No comments:
तुम ये क्या कर रहे हो
दुश्मनों के बजाय आपस में लड़ रहे हो
उन्होंने फायदे के लिए बाटा हमें
छोटी सी बात समझ नहीं आ रही तुम्हे
लड़ाई जो तुम आपस में करोगे
तो इसका नुकसान भी तुम ही भरोगे
कोई और इसका फायदा उठाएगा
तुम्हारे हिस्से में कुछ न आयेगा
तुम जो इस तरह जियोगे
तो आगे कैसे बढोगे
भाई को भाई से ये आपस में लड़ाते है
दुसरो की मुर्गी में दाल अपनी गलाते है
अब भी वक़्त है सम्हल जाने का
न लड़कर इस पचड़े से बाहर आने का
मिलकर रहोगे तो होगी प्रगति
आपस में लड़ोगे तो होगी दुर्गति 

प्रदुषण (pollution)

8 comments:
बड़ी बड़ी चिमनियों से निकलता ये धुआं
है इंसानों की ज़िंदगी के लिए एक जुआ
धुल उडाती बड़ी गाड़ियां
फेफड़े के लिए है बीमारियाँ
प्रदुषण जो तेजी से बढ़ रहा है
नई नई बीमारियाँ पैदा कर रहा है
वाहनों की संख्या तेज रफ़्तार से बढ़ रही है
लोगो की मौत की नई परिभाषा गढ़ रही है
पेड़ रहे है तेजी से कट
जीवन प्रत्याशा रही है घट
प्रदुषण बढ़ रहा लगातार
फैक्ट्रिया जो खुल रही कई हज़ार
परमाणु उर्जा पे हो रहे हम निर्भर
विकिरण के साथ जीना हो रहा दुर्भर
नित नए हो रहे अविष्कार
ध्वनि प्रदुषण बढ़ा रहे लगातार
फैक्ट्रियो से छोड़े जा रहे अवशिष्ट
मिटटी खो रही अपनी गुण विशिष्ट
कचड़ा जो नदियों में डाला जा रहा
जल प्रदुषण फैला रहा
रोकना है अगर प्रदुषण बढ़ने की गति 
तो उपयोग में लाना होगा अपना मति 
सीमित रखो अपना उपयोग 
मत करो संसाधनों का दुरूपयोग