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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

Friday, 25 May 2012

देश की हालत

देख वतन का हाल
बहती है अश्क की धार
जनता को ही लुट रही
जनता की चुनी सरकार

अपराधियों से भरी संसद
कानून दिखती लाचार
रिश्वत की लत लगी सभी को
हर ओर फैला भ्रष्टाचार

चोर पुलिस है भाई भाई
आम जनता सहती अत्याचार
ईमानदारों का मुँह है बंद
बेईमानों को मिलता पुरुस्कार

जिसने भरा सबका पेट
वो सहता महंगाई की मार
अमीरों के साथ है दुनियां
गरीब हो गए है निराधार

छीन किसानों की जमीनें
हो गए कई मालदार
जिसने की आवाज़ बुलंद
पहुँच जाता है वो कारागार

रुकना नहीं (Don't Stop)

तेरी हर वार को हथियार बना तुझपे ही उलटवार करूँगा
कोई  मेरे वतन से  खिलवाड़ करे नागवार करूँगा
न मै कोई जुल्म सहूंगा न ही सहने दूंगा 
हर जुल्म और अत्याचार का मुहतोड़ जवाब मै दूंगा
सर पे कफ़न  बांध जो निकला हु घर से
बिना मंजिल  पे पहुचे न आराम करूँगा
जो कोई भी  मेरा  रास्ता  रोकेगा 
उसका जीना मै हराम करूँगा    
तेरी हर वार को हथियार बना तुझपे ही उलटवार करूँगा
कोई   मेरे  वतन  से खिलवाड़  करे  नागवार   करूँगा
मुझे पता है राह में मुश्किलें आएँगी बहुत
पर हर मुश्किलों पे अपनी जीत का परचम लहराऊंगा
हार न मानूंगा इन मुश्किलों से मै कभी
और दुनिया को मुश्किलों  से जीतना सिखलाऊंगा
तेरी हर वार को हथियार बना तुझपे ही उलटवार करूँगा
कोई मेरे  वतन से खिलवाड़  करे नागवार करूँगा

दहेज़ एक अभिशाप (Dowry System A Curse)

दहेज़ एक अभिशाप है
दहेज़ लेना और देना दोनों पाप है

सपने संजोये बेटिया पिया के घर जाते है
पर दहेज़ के लोभी उसे बहुत रुलाते है
जब वह ये सब नहीं सह पाती है
तब आत्महत्या कर जाती है

दहेज़ एक अभिशाप है
दहेज़ लेना और देना दोनों पाप है

देश के अन्दर आज अगर लडकिया न होगी
तो पत्नी और माएं भी न होगी
लडकियों को सम्मान और अधिकार दिलाना है
दहेज़ के छाप को लोगो के मन से मिटाना है

दहेज़ एक अभिशाप है
दहेज़ लेना और देना दोनों पाप है

दिनोदिन लडकियों की संख्या में गिरावट आ रही है
क्युकी लोगो के दिलो में दहेज़ की चिंता सताए जा रही है
अगर दहेज़ की व्यवस्था हो जाये ख़तम
तो लडकियों और लडको की संख्या बराबर रहेगी हरदम

दहेज़ एक अभिशाप है
दहेज़ लेना और देना दोनों पाप है

Wednesday, 23 May 2012

माता पिता का साथ (With Parents)

माता  पिता  का  कभी  साथ  न  छोड़ना
दिल  उनका  भूलकर  भी  न  तोडना
बहुत कुछ  सहकरके तुम्हे  बड़ा  किये  है
तुम्हे  अपने  पैरो  पर  खड़ा  किये  है
तुम्हारे  खुशियों  के  अलावा  कुछ  न  चाह रखते  है
तुम्हारे  मुस्कराहट  के  सिवा  कुछ  न  मांग  करते  है
माता  पिता  का  कभी  साथ  न  छोड़ना
दिल  उनका  भूलकर  भी  न  तोडना
खुद  से पहले  तुम्हे  खिलाते थे
जब  तुम  रोते  थे  तो  खुद  बच्चे  बन  जाते  थे
खुद  जागकर  तुम्हे  सुलाते  थे
घुटनों  में  बैठ  के  तुम्हे  चलना  सिखाते  थे
माता  पिता  का  कभी  साथ  न  छोड़ना
दिल  उनका  भूलकर  भी  न  तोडना
शिक्षक  बन  तुम्हे  पढाया
दर्द  सहते  हुए  भी  तुम्हे  हसाया
तुम  इस  ओहदे  पर  पहुचे  हो
तुम्हे  इस  काबिल  बनाया
माता  पिता  का  कभी  साथ  न  छोड़ना
दिल  उनका  भूलकर  भी  न  तोडना

Tuesday, 22 May 2012

युवा(Youth)

देश की  मुख्य  स्तम्भ  है  युवा
क्रांति  के  अग्रदूत  है  युवा
देश  को  अगर  भ्रष्टाचार  से  मुक्ति  दिलाना  है
तो  इसके  लिए  युवाओ  को  आगे  आना है
ये  युवा  ही  नए  भारत  को  गड़ेंगे
जब  ये  मिलकर  एक  साथ  गरजेंगे
मेरे  नज़र  में  हर  वो  शख्स  युवा  है
जिनके  तन  तो  नहीं  विचार  जवा है
हे  युवाओ  मत  करो  बर्बाद  अपनी  जवानी
देश  की  खातिर  दो  तुम  क़ुरबानी
हर  अन्याय  का  तुम  मुहतोड़  जवाब  दो
हर  अत्याचारी  से  तुम  हिसाब  लो
मत  करना  अपना  जीवन  कलंकित
कमजोरो  को  न  करना  आतंकित
हर  शख्स  को  मिले  न्याय  ऐसी  व्यवस्था  तुम  करो
भ्रष्टाचारियो  और  अन्यायी  से  तुम  न  डरो
अपने  कर्मो  से  लिखो  ऐसा  गीत
हो  जाये  पूरा  भारत  समृध्द

Monday, 21 May 2012

पर्यावरण (Environment)

पर्यावरण को बचाना हमारा ध्येय हो
सबके पास इसके लिए समय हो
पर्यावरण अगर नहीं रहेगा सुरक्षित
हो जायेगा सबकुछ दूषित
भले ही आप पेड़ लगाये एक
पूरी तरह करे उसकी देखरेख
सौर उर्जा का करे सब उपयोग
कम करे ताप विद्युत् का उपभोग
रासायनिक खाद का कम करे छिडकाव
भूमि को प्रदूषित होने से बचाव
कचड़ो का समुचित रीती से करो निपटारा
फिर न होगी कोई नदी प्रदुषण का मारा
फैक्ट्रियो में जब सौर यन्त्र लगाई जाएँगी
वायु प्रदुषण में अपने आप कमी आएँगी
तब जाकर पर्यावरण प्रदुषण में कमी आएँगी
आधी बीमारिया अपने आप चली जाएगी 

मेरा बचपन (My Childhood)

देखता हु जब बच्चो का लड़कपन 
याद आता है मुझे मेरा बचपन
 
सोचता हु फिर से बच्चा बन जाऊ
धमा चौकड़ी फिर से मचाऊ
तोतली जबान से पापा पापा चिल्लाऊ
पर वो जादू की छड़ी कहा से लाऊ
जिससे फिर से बच्चा बन जाऊ

देखता हु जब बच्चो का लड़कपन 
याद आता है मुझे मेरा बचपन

मुझे बहुत याद आता है वो समय
जब दिनभर खेलता था दोस्तों के साथ होकर निर्भय
माँ के डाटने पर घर चला जाता था
खाना खाकर जल्दी सो जाता था

देखता हु जब बच्चो का लड़कपन 
याद आता है मुझे मेरा बचपन

भाइयो के साथ झगडा मचाता था
पापा के आने पर शांत हो जाता था
पहिये दौड़ाकर मै खेला करता था
पेड़ो की पतली  टहनियों पर चढ़ा करता था

देखता हु जब बच्चो का लड़कपन
याद आता है मुझे मेरा बचपन

खिलौनों के लिए जिद किया करता था
जब मै मेलो में घुमा करता था
घुमने भैया के कंधो में बैठकर जाया करता था
मिठाईया और गुब्बारे लिवाया करता था

देखता हु जब बच्चो का लड़कपन 
याद आता है मुझे मेरा बचपन  

Sunday, 20 May 2012

मजदुर की अभिलाषा (wish of worker)

मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
मेहनत के बदले दो वक़्त की रोटी पाना
पढ़ा लिखाकर अपने बच्चो को
ऊँचे पदों पर पहुचाना चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
बंगले गाड़ी का शौक नहीं
एक छोटी सी कुटिया और
परिवार के साथ जीना चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
देश की उन्नति
राज्य की प्रगति
और गाँव की समृध्दी चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु
न हो भारत में कोई निर्धन
न हो किसी की भुखमरी से मौत
न हो कोई बेरोजगारी चाह रहा हु
मै मजदुर कुछ इस तरह जीना चाह रहा हु