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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

Monday, 12 January 2015

भ्रष्टाचार का जाल

आओ सुनाऊँ देश का हाल 
कैसा बिछा यहाँ भ्रष्टाचार का जाल 
एक बार मै बनवाने गया प्रमाण पत्र निवास 
बाबु बोला निकाल रूपये पचास 
मिनटों में निवास तुम्हारे हाथ होगा 
चक्कर काटने वाली ना कोई बात होगा 
मैंने कहा मेरे दिए टैक्स से मिलती है तुम्हे तनख्वाह 
क्यों परेशान कर रहे हो मांग कर रूपये बेवजह 
गुस्से में उसने बोला तुम मुझको सिखा रहे हो 
रिश्वत का बना नियम यहाँ, क्यों अपनी मति लगा रहे हो 
अगर नहीं मिला मुझको रूपये पचास 
कूड़ेदान में जायेगी तुम्हारी आवेदन निवास 
मैंने कहा तुम्हारी अधिकारी से करूँगा शिकायत 
फिर बैठेगी तुमपर पंचायत 
उसने कहा एक हिस्सा अधिकारी को भी जाता है 
वही तो हमको वसूली का टारगेट बताता है 
मैंने कहा आपने अभी जो बात कही है 
उसकी एक विडियो बन गई है 
हाथ जोड़कर खड़ा हो गया सामने 
गिडगिडाते लगा माफ़ी मांगने 
पांच मिनट में सील और साइन करा लाया 
निवास को थरथराते मेरे हाथ थमाया 

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