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एक अपील

ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोग लुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोश शिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबर पर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नही...

Tuesday, 6 January 2015

आओ पहल करे

किसी रूठे को मनाने का, किसी का बिगड़ी बनाने का
कोई रोते को हँसाने का, किसी भूखे को खिलाने का
थोड़ा ही सही, पर कुछ तो चहल करे
आओ पहल करे, आओ पहल करे

किसी का दर्द मिटाने का, अनपढों को पढ़ाने का
किसी को न्याय दिलाने का, बेवजह मुस्कुराने का
छोटा सा ही सही, पर प्रयास सफल करे
आओ पहल करे आओ पहल करे

धर्म और जात पात का, भाषा और क्षेत्रवाद का
अमीर और गरीब का, अपने अच्छे नसीब का
अहं को छोड़कर,झगडो को खतम करे
आओ पहल करे, आओ पहल करे

छत नहीं है जिसके पास, सोता जो खुले आकाश
कपकपाती ठण्ड में, कम्बल की जिसको है आस
रैन बसेरो का प्रबंध कर, कुछ की समस्या तो हल करे
आओ पहल करे, आओ पहल करे




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